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Year Endear 2018: अधूर काम कर लें पूरे, यह साल अभी बीता नहीं है

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Year Endear 2018: समय बीतता जाता है और उसके साथ हम भी। पर जो समय अभी बीता ही नहीं, उसे बीता हुआ मान लेना ठीक नहीं है। जो रेत मुट्ठी में बाकी है, उसे तो कम से कम यूं ही फिसलने से रोका जा सकता है। अब भी सात दिन बाकी हैं। बहुत कुछ है, जो हम कर सकते हैं। नया साल जब आएगा, तब उसका भी जश्न मना लेंगे।

हमें अपने जीवन में कई बार उलझनों का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, यह सोचकर कि इनसे क्या होगा। मगर कई बार हम इन्हीं के फेर में पड़कर अपना काम बिगाड़ लेते हैं। बाद में पछतावे के सिवा हमारे पास कुछ नहीं बचता है। यह स्थिति स्कूल, कॉलेज या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के सामाने अक्सर आती है। वह पढ़ाई में आने वाली छोटी-छोटी उलझनों को यह सोच कर दरकिनार कर देते हैं कि इनसे क्या होगा। मगर उनकी यही सोच परीक्षा के समय बड़ी परेशानी का कारण बन जाती है।

हर नए दिन के साथ कैलेंडर की तारीख बदल जाती है। दिन, हफ्ते, महीने और साल बीतते जाते हैं। हर बार साल के आखिर में यही लगता है कि यह साल बहुत जल्दी गुजर गया। जो करने का सोचा था, वह किया नहीं। और आखिर में वहीं खड़े हैं, जहां से इस साल की शुरुआत की थी। और फिर जब पूरे साल कुछ नहीं किया, अब क्या कर लेंगे! यही सोच कर हम अपने पिछले कामों को आने वाले साल पर छोड़ देते हैं। ज्यादातर लोग बीते साल की ऐसी ही उदासियों के साथ नए साल में कदम रखते हैं।

पर सात दिन यानी 168 घंटे कम नहीं होते। उसमें इस साल के कई अधूरे काम पूरे किए जा सकते हैं। कई कामों की नींव रखी जा सकती है। और दार्शनिक व लेखक सेनेका ने कहा था, ‘हर नई शुरुआत, किसी पिछली शुरुआत का अंत होती है।’ साल की शुरुआत व अंत हमारे अपने मन में है। कामों को करना ही, नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ाना है।

खुद से पहले दूसरों को रखें।
नए साल में काम करेंगे, यह सोचना एक तरह की बहानेबाजी है। कामों को टालना है। अपने मन को तसल्ली भर देना है। अगर काम करने हैं, तो बस उन्हें शुरू कर दें। यात्रा का नियम है, सामान जितना कम होगा, सफर उतना आरामदायक होगा। हम सब समय की यात्रा पर ही हैं। बीते समय के कामों का बोझ जितना कम होगा, आने वाला समय उतना ही सुकून देगा। मोटिवेशनल स्पीकर लिओ बॉबटा कहते हैं, ‘डेस्क पर पुराने अधूरे कामों की फाइलें जितनी कम होती हैं, नए काम उतनी ही तेजी से होते हैं।’

अब सवाल यह है कि हम कौन से काम कर सकते हैं? वैसे अपने कामों का लेखा-जोखा हम जानते हैं। पर कुछपर बात की ही जा सकती है। जैसे, पूरे साल जिन दोस्तों से मिलने की सोच रहे थे, उनसे मिल सकते हैं। बात कर सकते हैं। अतिरिक्त वस्तुओं और बेकार विचारों को बाहर कर सकते हैं। अब तक किसी की मदद नहीं की है, तो कुछ दान व सहयोग के काम कर सकते हैं। परिवार के साथ समय नहीं बिताया है तो दो या तीन दिन के लिए ही घूमने जा सकते हैं। कुछ लोगों को शुक्रिया कह सकते हैं। कुछ तक अपना प्यार पहुंचा सकते हैं। कुछ से माफी मांग सकते हैं। कुछ को माफ कर सकते हैं।

कुछ खराब रिश्तों से दूरी बना सकते हैं तो कुछ के करीब जा सकते हैं। अपना रेज्यूमे अपडेट कर सकते हैं। कुछ नया सीखने के लिए अपना नाम रजिस्टर करा सकते हैं। बेकार की सब्सक्रिप्शन हटवा सकते हैं। कुछअच्छा पढ़ने की शुरुआत कर सकते हैं। जिन सवालों से पूरे साल भागते रहे, उन पर बात कर सकते हैं। शरीर की बेहतरी के लिए डॉक्टर से मिल सकते हैं। पुराने उधार चुकाए जा सकते हैं। छोटा-मोटा निवेश कर सकते हैं, तो कुछ आने वाले बड़े कामों की योजना बना सकते हैं। कुछ रूठे अपनों को मना सकते हैं। कुछ बुरी बातों को भुला सकते हैं, कुछ अच्छी बातों को याद कर सकते हैं। एक बार सोचने लगेंगे तो कई काम ऐसे होंगे, जिनकी शुरुआत आज ही की जा सकती है।

आखिरकार, साल का अंत ना ही जिंदगी का अंत है और ना ही शुरुआत। यह समय का न रुकने वाला बहाव है। हमारी समझ, सूझबूझ सब हमारे भीतर ही है। और इसी के सही इस्तेमाल के साथ हम नए साल का स्वागत कर सकते हैं

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