दैनिक जीवन

Healthcare and beauty

Terror In Kashmir 2.0 : पुलवामा हमले का पैटर्न,सीरिया-अफगानिस्तान जैसा था

Follow on

Pulwama terror attack पुलवामा में दहशत फैलाने के लिए इस बार आतंकियों ने नए तरीके का सहारा लिया है. आतंकियों ने सीरिया-अफगानिस्तान वाले मॉडल को कश्मीर में अपनाया और CRPF की बस पर धावा बोल दिया.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को हुए आतंकी हमले में 37 जवान शहीद हुए हैं. इस हमले के बाद देशभर में गुस्सा है, हर कोई इस हमले का बदला लेने की मांग कर रहा है. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को जब सुरक्षाबलों का एक बड़ा काफिला जा रहा था, तभी एक गाड़ी आकर CRPF की बस से टकरा गई और धमाके में जवानों की शहादत हुई. आतंकियों ने इस बार हमला करने के लिए पुराना तरीका नहीं अपनाया, जिस तरीके से हमला हुआ है वह सीरिया और अफगानिस्तान मॉडल की तरह था.

कैसे हुआ आतंकी हमला?

गुरुवार दोपहर बाद 3:30 बजे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में यह हमला सुरक्षा बलों के एक काफिले पर हुआ. जिसमें 70 गाड़ियां शामिल थीं. इस काफिले में 20 से अधिक बस, ट्रक और SUV गाड़ियां शामिल थीं. CRPF द्वारा जारी बयान के मुताबिक इस आत्मघाती हमले का शिकार 76Bn CRPF की बस हुई. जिसमें 39 जवान सवार थे.

क्यों अलग है ये हमला?

दरअसल, अभी तक घाटी में जिस प्रकार हमले होते थे, वह इससे अलग थे. पहले कई हमलों का इतिहास देखें तो आतंकी सीधे जवानों के काफिले पर गोलियां बरसाते थे या फिर कहीं छुप पर आतंकी इन पर ग्रेनेड से हमला करते थे. इस तरह के हमले में सीमित ही नुकसान होता था, क्योंकि आतंकी को काफिले के करीब आना होता था लेकिन इतने ही देर में जवान उस पर जवाबी हमला बोल देते थे.

क्या है सीरिया-अफगानिस्तान का पैटर्न?

गुरुवार को पुलवामा में जिस तरह से हमला हुआ, उस प्रकार भारत में अभी तक कम ही हमले हुए हैं. इस हमले में आतंकी  अपनी गाड़ी में ही मौत का सारा सामान लेकर आया और सेना के काफिले में जा घुसा. वह सीधा CRPF की बस से टकराया, जिससे पूरी बस तहस-नहस हो गई और आस-पास के वाहनों को भी नुकसान पहुंचा. इस तरह के हमले बीते कुछ समय में अफगानिस्तान और सीरिया में देखने को मिले हैं.

पिछले कुछ समय में अफगानिस्तान में अधिकतर हमले संसद के पास, बड़े अधिकारियों के आवास के पास जैसे क्षेत्रों में हुए हैं, जहां पर कारसवार सीधे बिल्डिंग में घुस जाते हैं और उसे उड़ा देते हैं. वहीं, सीरिया में भी IS लड़ाकों और सुरक्षाबलों की जंग में इस तरीके का इस्तेमाल होता आया है.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *