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दर्द से सीखिये ये 6 जरूरी बातें

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हर दर्द कुछ कहता है

आपको दर्द हो या फिर कोई गंभीर परिस्थिति। अकसर आप यही सवाल पूछते हैं कि आखिर मैं ही क्‍यों। खासतौर पर तब जब आप सेहतमंद रहने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हों।

कितना बुरा लगता है जब फिट रहने के लिए आप दौड़ लगाना शुरू करते हैं और कुछ दिनों बाद ही आपके पैरों की मांसपेशियां खिंचने लगती हैं। या आपको पता लगता है कि आपके जोड़ों में दर्द होने का कारण अर्थराइटिस है। लेकिन, इस तकलीफ को दूर करने और इसके प्रबंधन के लिए आपको गुस्‍से को दूर करने की जरूरत होती है। और आपको इस दर्द को सकारात्‍मक नजरिये से देखना पड़ता है। हम यहां आपको बताते हैं दस ऐसे इशारे जो आपका शरीर आपको दर्द के दौरान सिखाता है।.

दूसरों से तुलना न करें

हम बहुत आसानी से अपने जीवन में शामिल अन्‍य लोगों के साथ अपनी तुलना करने लगते हैं। आप किसी दूसरे को योगासन या जिम में कड़ी मेहनत करते देखते हैं। आप देखते हैं कि उसका शरीर कितना लचीला है। यह सब देखकर हमारे भीतर ईर्ष्‍या होने लगती है। लेकिन, यहां आपको यह समझने की जरूरत है कि हर व्‍यक्ति का शरीर दूसरे से अलग होता है। और खासकर व्‍यायाम करते समय तो आपको दूसरों की नकल बिलकुल नहीं करनी चाहिये। ऐसा करके आप अपने लिए परेशानी ही मोल लेंगे।

फिटनेस हासिल करना कोई प्रतियोगिता नहीं है। यह आपके अपने शरीर से जुड़ा मामला है। आपका शरीर दूसरे जैसा नहीं है। अपनी सीमाओं से अधिक मेहनत करना आपको नफा कम और नुकसान अधिक होता है।

कुछ व्‍यायाम आपके लिए नहीं

हर कोई मैराथन नहीं दौड़ सकता। इसमें कोई गलत बात नहीं। लेकिन, जब भी आपने लिए क्रॉसफिट क्‍लास, मांउटेन बाइकिंग या अन्‍य किसी प्रकार का व्‍यायमा करते हैं तो आपको चोट लग जाती है। और आपको उस चोट से रिकवर होने में एक सप्‍ताह से अधिक का वक्‍त लग जाता है। और ऐसे में आपको अपने बारे में बुरा लगता है।

तो, आपको अपने लिए ऐसा व्‍यायाम चुनना चाहिये जिसे आप रोजाना कर सकें। भले ही उसमें शारीरिक श्रम कम लगता हो, लेकिन वह आपकी शारीरिक क्षमताओं के अनुरूप हो। ऐसा व्‍यायाम किसी काम का नहीं जिसमें आप खूब पसीना बहायें और चोटिल हो जाएं। आपकी मांसपेशियों में सूजन आ जाए।

क्‍या कहता है तन

अगर आप सुनना चाहें तो आपका शरीर आपको सभी जरूरी संकेत देता है। शरीर में दर्द आपको यह बताता है कि कहीं कुछ सही नहीं है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आप अपने शरीर के इशारों को नहीं समझ रहे और बहुत जल्‍दी बहुत ज्‍यादा जोर लगा रहे हैं। इससे यह भी पता चलता है कि आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं जिस पर फौरन ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

लेकिन, कहीं आप पीड़ा बिना मंजिल नहीं मिलती के निय‍म पर चलते हैं तो शायद आप इन इशारों की अनदेखी कर देते हैं। और ऐसे में आप न तो सही प्रकार व्‍यायाम कर पाते हैं और न ही अपनी सेहत का सही खयाल ही रख पाते हैं।

ब्रेक तो बनता है

व्‍यायाम के दौरान आराम करना भी जरूरी है। अगर आप व्‍यायाम के दौरान अपनी मांसपेशियों को आराम करने का पूरा वक्‍त नहीं देंगे तो इससे वे रिकवर नहीं हो पाएंगी और ऐसे में वे मजबूत भी नहीं बनेंगी। बल्कि अधिक जोर से मांसपेशियां टूट भी सकती हैं।

लेकिन आराम का अर्थ आराम से बैठकर टीवी देखना नहीं है। सक्रिय रिकवरी व्‍यायाम का जरूरी हिस्‍सा है और इसे अवश्‍य किया जाना चाहिेये ताकि आप बिना दर्द और थकान के व्‍यायाम कर सकें। आप चाहें तो व्‍यायाम के बीच में थोड़ा चल लें। फिटनेस कार्यक्रम में रोजाना कोई न कोई व्‍यायाम जरूर शामिल होना चाहिये। लेकिन अगर आप दर्द से जझ रहे हैं, तो आपको आराम के जरिये मांसपेशियों को रिकवर करना चाहिये।

संयम रखें

चोट से रिकवर होने के लिए संयम रखना जरूरी है। बेशक आपके लिए रिकवरी का वक्‍त काटना मुश्‍किल हो, लेकिन यह जीवन का जरूरी सबक है। यह सबक है कि आपको चीजें राफ्ता-राफ्ता ही हासिल होता है। और अगर जल्‍दबाजी में आप ठीक होने से पहले ही काम में जुट जाएं तो इससे आपकी चोट और बुरी हो सकती है।

अगर आप अर्थराइटिस जैसी बीमारी को दूर करने के लिए व्‍यायाम कर रहे हैं, तो आपको और खयाल रखने की जरूरत होती है। आपको व्‍यायाम धीरे-धीरे शुरू करना चाहिये और फिर उसमें इजाफा करना चाहिये। बेहतर होगा अगर आप अपने व्‍यायाम से पहले डॉक्‍टर से सलाह ले लें। लेकिन, इसके साथ ही अपने शरीर के संकेतों को अनदेखा न करें।

 

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