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Navratri में नाव पर सवार होकर आएंगी देवी मां और मनुष्य पर सवार होकर जाएंगी

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Navratri 10 अक्टूबर, बुधवार से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। यूं तो मां दुर्गा का वाहन सिंह है, लेकिन हर साल नवरात्र के समय माता अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, देवी के अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर आने से इसका असर भी अलग-अलग ही बताया गया है।

देवी भागवत के अनुसार

  1. शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
    गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकी‌र्त्तिता
    अर्थ- सोमवार व रविवार को प्रथम पूजा यानी कलश स्थापना होने पर मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। शनिवार और मंगलवार को नवरात्र शुरू होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्र शुरू होने पर माता डोली में बैठकर आती हैं। बुधवार से नवरात्र शुरू होने पर माता नाव पर सवार होकर आती हैं।
  2. माता का वाहन और उससे होने वाला असर

    माता दुर्गा जिस वाहन से पृथ्वी पर आती हैं, उसके अनुसार साल भर होने वाली घटनाओं का भी आंकलन किया जाता है।

    तत्तफलम: गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे।
    नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।। 

    अर्थ- देवी जब हाथी पर सवार होकर आती है तो पानी ज्यादा बरसता है। घोड़े पर आती हैं तो पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका बढ़ जाती है। देवी नौका पर आती हैं तो सभी की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और डोली पर आती हैं तो महामारी का भय बना रहता हैं।

  3. किस दिन कौन-से वाहन पर सवार होकर जाती हैं देवी

    माता दुर्गा आती भी वाहन से हैं और जाती भी वाहन से हैं। यानी जिस दिन नवरात्र का अंतिम दिन होता है, उसी के अनुसार देवी का वाहन भी तय होता है। देवी भागवत के अनुसार-

    शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।

    शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।

    बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।

    सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥

    अर्थ- रविवार और सोमवार को देवी भैंसा की सवारी से जाती हैं तो देश में रोग और शोक बढ़ता है। शनिवार और मंगलवार को देवी मुर्गा पर सवार होकर जाती हैं, जिससे दुख और कष्ट की वृद्धि होती है। बुधवार और शुक्रवार को देवी हाथी पर जाती हैं। इससे बारिश ज्यादा होती है। गुरुवार को मां भगवती मनुष्य की सवारी से जाती हैं। इससे जो सुख और शांति की वृद्धि होती है।

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