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NASA का ‘मार्स इनसाइट लैंडर ‘ उतरा मंगल ग्रह की सतह पर , देखिए पहली तस्वीर

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NASA के मार्स इनसाइट लैंडर को महीने पहले लॉन्च किया गया था , 358 किलों का मार्स 48 करोड़ किलोमीटर की दुरी तय करके मंगल ग्रह पर पंहुचा है | 10 से ज्यादा देश और विदेश के वैज्ञानिक ने मिलकर 7000 करोड़ के मिशन को अन्जाम दिया हैं |


NASA का मार्स इनसाइट लैंडर मंगल ग्रह की सतह पर उतर चुका हैं , मार्स भारतीय समयानुसार 1 बजकर
24 मिनट पर सोमवार-मंगलवार रात को सतह पर पहुँचा | मार्स ग्रह की सतह पर उतरने के दौरान 
19,800 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज़ी से 6 मिनट के भीतर 0 की रफ़्तार पर आ गया | इसके बाद मार्स 
पैराशूट से बाहर आया और अपने तीन पैरों पर लैंड किया।

NASA ने मार्स यान को मंगल ग्रह के निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए और मंगल ग्रह से जुड़े नए 
तथ्यों का पता लगाने के लिए बनाया है। नासा का मार्श इनसाइट सिस्मोमीटर की मदद से मंगल ग्रह की 
आंतरिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगा।

NASA के मार्स इनसाइट में 1 बिलियन डॉलर (7000 करोड़ ) का खर्च आया है। सौर ऊर्जा और बैटरी से
ऊर्जा पाने वाले लैंडर को 26 महीने तक संचालित होने के लिए डिजाइन किया गया है। परन्तु नासा को 
उम्मीद है कि मार्स इनसाइट इससे अधिक समय तक अपना काम करता रहेगा ।



NASA के अनुसार पहली बार एक्सपेरिमेंटल सैटेलाइट्स 'वॉल-ई ' और 'ईव' मार्स की लैंडिंग को ट्रैक 
किया |'वॉल-ई ' और 'ईव' सैटेलाइट्स मंगल ग्रह पर पहुंच रहे मार्स से 6 हजार मील पीछे था | 
नासा ने 5 मई 2018 को कैलिफोर्निया के वंडेनबर्ग एयरफोर्स स्टेशन से एटलस वी रॉकेट के माध्यम से 
मार्स लैंडर लॉन्च किया गया था |

इनसाइट के लिए लैंडिंग में लगने वाला 6 से 7 मिनट का समय बेहद महत्वपूर्ण होगा। इस दौरान मार्स लैंडर 
के पीछा कर रहे दोनों सैटेलाइट्स के जरिए दुनियाभर के वैज्ञानिकों की नजरें इनसाइट पर रहेंगी। डिज़्नी के 
किरदारों के नाम वाले ये सैटेलाइट्स ‘वॉल-ई' और ‘ईव' 8 मिनट के अंदर इनसाइट की लैंडिंग के 
स्टेटस को सिग्नल्स के जरिए धरती तक पहुंचा देंगे। नासा इस पूरे मिशन का लाइव कवरेज भी करेगा। 
लैंडिंग के 2 घंटे के बाद नासा इसकी जानकारी शेयर कर सकेगा।
  •  NASA इनसाइट प्रोजेक्ट के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रूस बैनर्ट ने कहा कि मार्स लैंडर एक टाइम मशीन है, जो यह पता लगाएगी कि 4.5 अरब साल पहले मंगल, धरती और चंद्रमा जैसे पथरीले ग्रह कैसे बने।
  • मार्स लैंडर  मुख्य उपकरण सिस्मोमीटर (भूकंपमापी) है, जिसे फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी ने बनाया है। लैंडिंग के बाद ‘रोबोटिक आर्म’ सतह पर सेस्मोमीटर लगाएगा। दूसरा मुख्य टूल ‘सेल्फ हैमरिंग’ है जो ग्रह की सतह में उष्मा के प्रवाह को दर्ज करेगा।
  • NASA ने इनसाइट को लैंड कराने के लिए इलीशियम प्लैनिशिया नाम की लैंडिंग साइट चुनी है। यह लैंडिंग साइट इनसाइट को सपाट सतह देगी, जिससे इसे सिस्मोमीटर लगाने और सतह को ड्रिल करने में मदद मिलेगी।

भूकंप से पैदा होने वाली सिस्मिक वेव से बनाया जाएगा मंगल का आंतरिक नक्शा:-
मार्स पर भूकंप से पैदा होने वाली सिस्मिक वेव से मंगल के आंतरिक नक्शे बनेंगे। पहले भेजे गए क्यूरोसिटी स्पेसक्राफ्ट का फोकस पानी पर था, लेकिन यह सैटेलाइट मंगल की संरचना का अध्ययन करेगा।

धरती जैसा है मंगल:-
मंगल ग्रह कई मामलों में पृथ्वी के समान है। दोनों ग्रहों पर पहाड़ हैं। हालांकि, पृथ्वी की तुलना में इसकी चौड़ाई आधी, भार एक तिहाई और घनत्व 30% से कम है।

ऐसे खोलेगा मंगल ग्रह के रहस्य:-

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मार्स इनसाइट लेंडर मंगल के रहस्य खोलेगा। नासा का यह यान लाल ग्रह की जानकारियां पृथ्वी पर भेजेगा। जानकारी के अनुसार, यह यान ग्रह की आंतरिक संचरना का अध्ययन करने के लिए सिस्मोमीटर का उपयोग करने वाला है जिससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मंगल का निर्माण कैसे हुआ और यह पृथ्वी से इतना अलग क्यों है।

 



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