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कार्तिक पूर्णिमा (kartikpurnima भी है बेहद खास, गंगा स्नान का होता है महत्व

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मान्यताओं के मुताबिक इस कार्तिक पूर्णिमा (kartik purnima) को भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था.

हिंदू धर्म में कार्तिक महीना त्योहार के लिहाज से काफी अहम माना जाता है. इस महीने में काफी त्योहार एक के बाद एक मनाए जाते हैं. वहीं हिंदू धर्म में पूर्णिमा का भी अपना एक अलग महत्व है. इसके साथ ही कार्तिक पूर्णिमा भी काफी मायने रखती है. इस साल कार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर को मनाई जाएगी.

मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था और संसार को राक्षस के भय से मुक्त करवाया था. इस कारण इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. वहीं इस दिन पूजा करने के लिए बताया जाता है कि अपने हाथ-पांव धोकर आचमन (तांबे के विशेष पात्र से हथेली में जल लेकर ग्रहण करना और खुद पर जल छिड़क कर शुद्ध करने की प्रक्रिया) करके हाथ में कुशा लेकर स्नान किया जाता है.

गंगा स्नान का महत्व

मान्यताओं के मुताबिक कार्तिक महीने में किए गए दान, व्रत, तप, जप आदि का लाभ आने वाले समय तक मिलता रहता है. वहीं माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति कार्तिक महीने के आखिरी दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा को गंगा में स्नान करता है तो उसके लिए यह काफी फलदायी साबित होता है. कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व बताया जाता है. इस दिन गंगा में स्नान करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से पापों का प्रायश्चित किया जा सकता है. साथ ही इस दिन गंगा स्नान से ग्रह दोषों को भी जन्मकुंडली से बाहर किया जा सकता है.

ऐसे करें पूजा

 

 

वहीं विष्णु भगवान की पूजा भी इस दिन की जानी चाहिए. भगवान विष्णु को केसर के दूध से स्नान कराकर षोडशोपचार पूजन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना इस दिन काफी शुभ माना जाता है. इससे धन, सुख, वैभव, संपत्ति की मनोकामना पूरी होती है.

करें दान

दान का भी इस दिन काफी महत्व होता है. माना जाता है कि इस दिन गरीबों को खाना खिलाना चाहिए. वहीं इस दिन दान करते वक्त हाथ में जल होना चाहिए. साथ ही इस दिन चावल का दान करने से शुभ फल हासिल किया जा सकता है. कार्तिक पूर्णिमा पर दिया गया दान पापों को नष्ट करने वाला बताया जाता है.

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