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Jhanshi की रानी घायल होने के बाद भी अंग्रेजों से लड़ती रही मर्दानी, By:-Denik Jivan

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Jhanshi की रानी 4 साल थी जब उनकी माँ गुजर गयी थी , पिता मोरोपंत तांबे बिठूर जिले के पेशवा के यहां काम करते थे और पेशवा ने उन्हें अपनी बेटी की तरह पाला |

अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्‍म ‘मणिकर्णिका: द क्‍वीन ऑफ झांसी’ का टीजर रिलीज हो गया है। फिल्म की कहानी झांसी की रानी के जीवन पर आधारित है। टीजर में कंगना रनौत झांसी की रानी के किरदार में हैं और जंग के मैदान में दोनों हाथों में तलवार लेकर अंग्रेजों से लड़ती हुई नजर आ रही हैं। रानी लक्ष्मीबाई पर लिखी कई किताबों में उनके जीवन से जुड़े कई किस्सों का जिक्र है जो बहुत कम लोग ही जानते हैं। जैसे रानी लक्ष्मीबाई कैसी दिखती थीं, अंग्रेजों से लड़ाई की कहानी और उनकी मौत कैसे हुई। जानते हैं उनके जीवन से जुड़े ऐसे कुछ किस्से…

  • सफेद मखमल की साड़ी पहनती थीं

    • रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1828 को बनारस के एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ और मणिकर्णिका नाम दिया गया। बचपन में उन्हें मनु कहकर बुलाया जाता था।
    • 4 साल की उम्र में मां गुजर गई थीं। पिता मोरोपंत तांबे बिठूर जिले के पेशवा के यहां काम करते थे और पेशवा ने उन्हें अपनी बेटी की तरह पाला, प्यार से नाम दिया छबीली। मणिकर्णिका का ब्याह झांसी के महाराजा राजा गंगाधर राव नेवलकर से हुआ और देवी लक्ष्मी पर उनका नाम लक्ष्मीबाई पड़ा। और वह झांसी की रानी कहलाईं।
    • रानी ने वकील जॉन लैंग की कई बार सेवाएं लीं जिसने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक केस जीता था। लैंग अच्छी फारसी और हिंदुस्तानी बोलते थे और ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन उन्हें पसंद नहीं करता था क्योंकि वो हमेशा उन्हें घेरने की कोशिश किया करते थे।
    • किताब में रेनर जेरॉस्च ने जॉन लैंग को कहते हुए बताया, ‘रानी मध्यम कद की तगड़ी महिला थीं। अपनी युवावस्था में उनका चेहरा बहुत सुंदर रहा होगा, लेकिन अब भी उनके चेहरे का आकर्षण कम नहीं था। मुझे एक चीज़ थोड़ी अच्छी नहीं लगी, उनका चेहरा ज़रूरत से ज्यादा गोल था, हां उनकी आंखें बहुत सुंदर थीं और नाक भी काफी नाजुक थी। उनका रंग बहुत गोरा नहीं था। उन्होंने एक भी जेवर नहीं पहन रखा था, सिवाए सोने की बालियों के। उन्होंने सफेद मलमल की साड़ी पहन रखी थी।
    • अंग्रेजों और रानी लक्ष्मीबाई की लड़ाने में उस लड़ाई में भाग ले रहे ब्रिटिश जॉन हेनरी सिलवेस्टर ने अपनी किताब ‘रिकलेक्शंस ऑफ द कैंपेन इन मालवा एंड सेंट्रल इंडिया’ में लिखा, अचानक रानी ज़ोर से चिल्लाई, ‘मेरे पीछे आओ।’ पंद्रह घुड़सवारों का एक जत्था उनके पीछे हो लिया।
    • अचानक रॉड्रिक ने अपने साथियों से चिल्ला कर कहा, ‘दैट्स दि रानी ऑफ़ झाँसी, कैच हर” रानी और उनके साथियों ने भी एक मील ही का सफर तय किया था कि कैप्टन ब्रिग्स के घुड़सवार उनके ठीक पीछे आ पहुंचे। जगह थी कोटा की सराय। लड़ाई नए सिरे से शुरू हुई। अचानक रानी को अपने बायें सीने में हल्का-सा दर्द महसूस हुआ, जैसे किसी सांप ने उन्हें काट लिया हो। एक अंग्रेज़ सैनिक ने जिसे वो देख नहीं पाईं थीं, उनके सीने में संगीन भोंक दी थी। वो तेज़ी से मुड़ीं और अपने ऊपर हमला करने वाले पर पूरी ताकत से तलवार लेकर टूट पड़ीं।
    • लड़ाई के बाद अचानक घोड़े पर दौड़ते-दौड़ते उनके सामने एक छोटा-सा पानी का झरना आ गया। उन्होंने सोचा वो घोड़े की एक छलांग लगाएंगी और घोड़ा झरने के पार हो जाएगा। लेकिन घोड़े ने एक इंच भी आगे बढ़ने से इंकार कर दिया। तभी उन्हें लगा कि उनकी कमर में बाई तरफ़ किसी ने बहुत तेज़ी से वार हुआ है। उनको राइफ़ल की एक गोली लगी थी. रानी के बाएं हाथ की तलवार छूट कर ज़मीन पर गिर गई।

      कमर के बायीं ओर लगी थी गोली

  • जब रानी पर हुआ जानलेवा हमला

    • एंटोनिया फ़्रेज़र अपनी पुस्तक, ‘द वॉरियर क्वीन’ में लिखती हैं, “तब तक एक अंग्रेज़ रानी के घोड़े की बगल में पहुंच चुका था। उसने रानी पर वार करने के लिए अपनी तलवार ऊपर उठाई। रानी ने भी उसका वार रोकने के लिए दाहिने हाथ में पकड़ी अपनी तलवार |

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