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Igloo के बारे में नहीं जानते होंगे आप ये रोचक जानकारी

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Igloo की  कहानी :- साइंस की किताब में शायद तुम बर्फ वाले घर यानी इग्लू के बारे में पढ़ चुके होगे। लेकिन बर्फ वाले इस घर से जुड़ी कुछ बातें हैं, जिन्हें शायद तुम नहीं जानते होगे।

कार्टून फिल्मों में तुमने इग्लू देखे होंगे। हां, वही सफेद रंग के इग्लू, जो बर्फीली जगहों पर होते हैं। कई बार मन करता है कि काश, हम भी इग्लू में रह सकते! पर क्या करें, वे तो सिर्फ टीवी की दुनिया में होते हैं! असली दुनिया में तो कभी इग्लू देखने को भी नहीं मिलते। तुम भी यही सोचते हो, तो तुम्हें बता दें कि इग्लू सचमुच में होते हैं। आओ, उनके बारे में जानते हैं-

Igloo में नहीं रहते पेंग्विन:-
तुमने अधिकतर कार्टून फिल्मों और वीडियो में देखा होगा कि इग्लू में पेंग्विन रहते हैं। पर असल बात तो यह है कि इग्लू में पेंग्विन नहीं, बल्कि इनसान रहते हैं और उन्हें एस्किमो कहा जाता है। वे खासतौर पर पृथ्वी के उत्तरी हिस्से यानी आर्कटिक क्षेत्र में पाए जाते हैं, जहां के मूल निवासियों को इनुइट कहा जाता है। पहली बार इग्लू को इनुइट लोगों ने ही बनाया था। बाद में दूसरी जगह के एस्किमो ने इग्लू बनाना शुरू किया।

क्या है एस्किमो का अर्थ:-
सुनने में अजीब है न यह शब्द। यह दरअसल अमेरिका का एक मूल शब्द है, जिसका मतलब होता है, कच्चा मांस खाने वाला व्यक्ति। यह नाम उन्हें 16वीं शताब्दी में दिया गया था। अलग-अलग जगहों के एस्किमो की बोली और भाषा भी अलग-अलग होती है।

कैसे होते हैं एस्किमो:-
एस्किमो आर्कटिक क्षेत्र के अलावा ग्रीनलैंड, कनाडा, पूर्वी रूस के उप आर्कटिक क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं। वर्तमान में लगभग 1,35,000 लोग इस समुदाय से आते हैं। पारंपरिक तौर पर एस्किमो को ठंड से घिरे वातावरण में रहने की आदत होती है। बर्फ की वजह से वहां पेड़ नहीं उगा पाते, इसलिए उन्हें मांस खाकर जिंदा रहना पड़ता है। वे सील, व्हेल मछली का मांस खाते हैं।

क्यों बनाए जाते हैं इग्लू (Igloo):-
एस्किमो गर्मियों के लिए अलग घर बनाते हैं और ठंड के लिए अलग। ठंड वाले घर को इग्लू कहते हैं। इग्लू का मतलब होता है बर्फ का घर। चूंकि ठंड के दिनों में वहां का तापमान -50 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है, इसलिए ठंड से बचने के लिए एस्किमो इग्लू का निर्माण करते हैं। इग्लू बनाने के लिए वे ठोस बर्फ के टुकड़ों को आपस में जोड़ देते हैं। इग्लू के अंदर किसी व्यक्ति का दम न घुटे, इसलिए इग्लू की छत पर एक छेद भी किया जाता है। कई बार इग्लू को बाहर से कंबलों से भी ढक दिया जाता है, ताकि अंदर भी गर्मी बरकरार रहे। इग्लू तूफान आने पर टूटे नहीं, इसलिए उसे गुंबद का आकार दिया जाता है। कई बार सील या कैरिबू (वहां का हिरण) के चमड़े से खिड़की भी बनाई जाती है। इग्लू को बनाने में कम से कम डेढ़ घंटे का वक्त लगता है।

इग्लू (Igloo) कैसे रहता है अंदर से गरम:-
जिस तरह रजाई या स्वेटर हमारे शरीर की गर्मी को अंदर रोककर हमें गरम रखते हैं, उसी तरह बर्फ के घर भी अंदर रह रहे लोगों के शरीर से उत्पन्न गर्मी को बाहर नहीं जाने देते। यही वजह है कि ठंड से बचने के लिए एस्किमो इग्लू बनाते हैं।

इग्लू (Igloo) वाले होटल:-


कई देशों में इग्लू जैसे होटल बनाए जाते हैं। लोग इनमें ठहरकर इग्लू में रहने का अनुभव लेते हैं। लोग रात को इन इग्लू की खिड़कियों से बाहर का मनोरम दृश्य देख सकते हैं। ये देश हैं स्वीडन, फिनलैंड, नॉर्वे, ऑस्ट्रिया आदि।

छोटे आकार के इग्लू (Igloo) :-

एस्किमो जब समुद्री जीवों का शिकार करने समुद्र के पास जाते हैं, तो वे पास में ही एक अस्थाई इग्लू का निर्माण करते हैं, जिसमें वे दो या तीन दिन तक रहते हैं। शिकार के बाद वे उसे तोड़ देते हैं।

मध्यम आकार के इग्लू (Igloo) :-

इस तरह के इग्लू (Igloo) में केवल एक बड़ा कमरा होता है, जिसमें दो परिवार आराम से रह सकते हैं। आमतौर पर ऐसे इग्लू (Igloo) के आसपास कई और इग्लू भी बनाए जाते हैं, जिससे वह क्षेत्र बिल्कुल गांव की तरह दिखता है।

बड़े आकार के इग्लू (Igloo) :-

इस तरह के इग्लू (Igloo) जोड़े में बनाए जाते हैं, जिनमें से एक इग्लू (Igloo) स्थाई होता है और दूसरा अस्थाई। पांच कमरे वाले स्थाई इग्लू (Igloo) में 20 लोग रह सकते हैं। ये आपस में सुरंग से जुड़े होते हैं। अस्थाई इग्लू खास मौकों के लिए तैयार किए जाते हैं, जैसे कि पारंपरिक आयोजन या सामूहिक नृत्यों के लिए।

 

 

 

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