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ये घरेलू उपाय कारगर हो सकते हैं Asthama में, By:- Denik Jiven

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Asthama को काबू में रखने के अनेक उपाय हैं, जिनमें से कुछ को तो आप घर में ही आजमा सकते हैं। ऐसे उपायों से आमतौर पर कोई नुकसान नहीं होता, फिर भी सावधानी बरतनी जरूरी है। आइए जानें कि क्या-क्या हैं ये उपाय और इनका लाभ कैसे उठाया जा सकता है।

अपनी समस्या को समझना है जरूरी :-

खुद को सर्दियों में अस्थमा की परेशानी से बचाने के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ऐसी कौन सी बात है, जिसकी वजह से आपको अचानक से अस्थमा का अटैक पड़ता है। धूम्रपान, आग के पास बैठने के अलावा और ऐसे कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से आपकी समस्या बढ़ जाती है। क्या आप बाहर जाते हैं तो आपकी स्थिति खराब हो जाती है या फिर आपके आहार में शामिल कोई ऐसी वस्तु है, जो अस्थमा के बढ़ाने के कारण है? जब आप इस बारे में जान लेंगे तो खुद को सर्दियों में अस्थमा की वजह से होने वाली परेशानियों से आसानी से बचा सकेंगे।

इस बात का ख्याल रखें कि आपके घर में धूल और धुआं ना रहे। इसके लिए सर्दियों के मौसम में घर में आग जलाने से बचें। घर को गरम करने के लिए हीटर का इस्तेमाल करते हैं तो उसके फिल्टर को साफ करते रहें और इस बात का ध्यान रखें कि हीटर चलते समय आप उसके सामने ना बैठे हों।इन्हेलर हमेशा अपने पास रखें और स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
अस्थमा का अटैक ठंड की वजह से ज्यादा पड़ता है। इससे बचने के लिए अपने शरीर को गर्म रखें। इसके लिए घर से बाहर जाते समय स्वेटर के साथ-साथ मोजे, दस्ताने और टोपी पहनें। गले को मफलर या स्कार्फ से अच्छी तरह ढंककर रखें।
रूम हीटर के पास बैठते समय इस बात का ध्यान रखें कि ऊनी कपड़ों के रेशे आग के पास बैठने पर जलते हैं और इससे निकलने वाला धुआं अस्थमा के रोगियों के लिए घातक साबित होता है।

नियमित तौर पर व्यायाम करें, लेकिन व्यायाम करने से पहले खुद को वॉर्म-अप करना कभी भी न भूलें।अपने आहार में तरल पदार्थों को अधिक शामिल करें। घर पर बना कम वसा युक्त भोजन करें। अपने आहार में ताजे फल और सब्जियों को अधिक से अधिक शामिल करें। यह महज धारणा है कि खट्टे फल खाने से अस्थमा बढ़ता है। इसलिए अपने आहार में खट्टे मौसमी फलों को भी शामिल करें, बशर्ते आपको उससे एलर्जी क्यों ना हो।साफ सुथरे धुले हुए कपड़े पहनें। ऊनी कपड़े सीधे पहनने से बचें। ऊनी कपड़े पहनने से पूर्व कोई सूती कपड़ा पहनें।

ये भी हैं कारगर :-

दमा के इलाज में लहसुन रामबाण औषधि का काम करता है। 30 मि.ली. दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का नियमित तौर पर सेवन करें। इसका हर रोज इस्तेमाल करने से अस्थमा की शुरुआती अवस्था में लाभ होता है।अदरक वाली गरमागरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से अस्थमा नियंत्रित रहता है।

सर्दियों के मौसम में सुबह-शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को लाभ होता है।पानी में अजवाइन मिलाकर इसे अच्छी तरह से उबाल लें। अब इस पानी से भाप लें। इससे आपके गले को आराम मिलेगा और अस्थमा की समस्या नियंत्रित भी रहेगी। चार-पांच लौंग को एक कप पानी में पांच मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं और इसे गरम-गरम पिएं। प्रतिदिन दो से तीन बार यह काढ़ा पीने से अस्थमा के मरीज को राहत मिलती है।

नमक पर रखें नियंत्रण :-

अगर आपको खाने में ज्यादा नमक डालने की आदत है तो अपनी इस आदत पर विराम लगाएं, क्योंकि इससे अस्थमा को बढ़ावा मिलता है। भोजन में नमक का अधिक इस्तेमाल करने की वजह से आपके शरीर में पोटैशियम की मात्रा कम होती है, जो फेफड़ों के सही तरीके से कार्य करने के लिए जरूरी है। इसलिए अपने भोजन में नमक कम होने पर नमक डालकर खाने की बजाय उसके स्वाद को बढ़ाने के लिए दूसरे मसालों का इस्तेमाल करें। अगर लगातार ऐसा भोजन करने से कोई दिक्कत होती है तो किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह अवश्य ले लें।

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