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आप के हे गठिया रोग ये आयुर्वेदिक तेल, दर्द के साथ सूजन भी होगी दूर By:-denikjiven

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गठिया रोगियों के लिए सर्दियों का मौसम किसी सजा से कम नहीं होता है। इस मौसम में जिन लोगों को जोड़ों का दर्द रहता है और अर्थराइटिस के मरीजों का एक एक दिन काटना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते न सिर्फ चलने फिरने में दिक्कत होती है बल्कि कई बार मांसपेशियों में खिचांव भी आ जाता है। दर्द ही नहीं बल्कि यह मौसम गठियों रोगियों के शरीर में सूजन भी पैदा करता है। जो लोग वर्किंग हैं और सुबह जल्दी बाहर निकलते हैं उनके लिए यह और भी ज्यादा परेशान का सबब बनता है। आज हम आपको गठिया रोग से छुटकारा पाने के लिए कुछ ऐसे आयुर्वेदिक तेल के बारे में बता रहे हैं जो वाकई बहुत फायदेमंद है। तो आइए जानते हैं कौन से हैं ये तेल।

ये है जबरदस्त आयुर्वेदिक तेल

गठिया या अर्थराइटिस के दर्द से छुटकारा पाना या इस रोग से जीतना आसान नहीं है। इसके लिए मार्किट में कई तरह की आयुर्वेदिक दवा और थैरेपी उपलब्ध है। बावजूद इसके लोग आयुर्वेदिक और प्रकृति की ओर हाथ आजमाते हैं। आज हम आपको गठिया के लिए एक ऐसा आयुर्वेदिक तेल बता रहे हैं जो गठिया और जोड़ों के दर्द को काफी हद तक कम करता है।

इसके लिए किसी एक पैन को अच्छी तरह धोकर उसमें शुद्ध सरसों का करीब 10 से 12 चम्मच तेल डालें। इसे थोड़ा गर्म करने के बाद इसमें 4 से 5 लहसुन की कलियां डाले, करीब 1 बड़ा चम्मच अजवायन, 5 से 6 लौंग और 4 से 5 काली मिर्च डालें। अब इस तेल को हल्की आंच पर तब तक पकाएं जब तक कि इससे धुआं न निकले। जब यह मिश्रण अच्छी तरह पक जाए तो गैस को बंद कर दें। जब ये मिश्रण ठंडा हो जाए तो इसे किसी एक बर्तन में रखें जिसमें यह सुरक्षित रहे। आप इसे फ्रिज में भी रख सकते हैं और बाहर भी रख सकते हैं। रोजाना सुबह शाम 10 मिनट इस तेल से मालिश करें। यकीन मानिए यह वाकई में फायदेमंद है।

अरंडी का तेल

अरंडी के तेल यानी कैस्टर ऑयल का उपयोग करने से यह हमारे शरीर के अंदर प्राकृतिक रूप से लिम्फोसाइट बढ़ने लगते हैं। लिम्फोसाइट कोशिकाओं के बीच में पाया जाने वाला टी-सेल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। कैस्टर ऑयल की मालिश से 24 घंटों में ही टी-कोशिकाओं की संख्या असानी से बढ़ जाती है। टी-कोशिकाओं जो शरीर के रोगों से लड़ने में सहायक होती है। यह एक प्रकार की श्वेत रूधिर कणिका है जो वायरस, बैक्टीरिया, कवक को मारकर कैंसर की कोशिकाओं के बढ़ने से रोकती है। टी-कोशिकाओं शरीर में लगने वाली चोटों को भी दूर करने का काम करती है। इसके अलावा शरीर के पुराने दर्द को भी ठीक करने का काम करती हैं।

अर्थराइटिस अगर शुरुआती स्टेज में है, तो अरंडी के तेल के नियमित उपयोग से इसके दर्द से भी राहत पाई जा सकती है। इसके लिए सबसे पहले अरंडी के तेल में थोड़ा सा अजवायन और कपूर मिलाकर गर्म कर लें। अब गुनगुना हो जाने पर इस तेल को जिस जगह पर दर्द की समस्या है, वहां पर लगाएं और हल्के हाथ से 15-20 मिनट तक मसाज करें ताकि तेल, त्वचा में समा जाए। ऐसा करने से आपको दर्द में राहत मिलेगी और जकड़न भी दूर होगी।

अर्थराइटिस के लिए अन्य घरेलू नुस्खे

  • पूरी रात पीड़ादायक जोड़ पर लाल फलालैन बांधने पर काफी लाभ मिलता है।
  • जैतून के तेल से भी मालिश करने से भी गठिया की पीड़ा काफी कम हो जाती है।
  • गठिया के रोगी को कुछ दिनों तक गुनगुना एनिमा देना चाहिए ताकि रोगी का पेट साफ़ हो, क्योंकि गठिया के रोग को रोकने के लिए कब्जियत से छुटकारा पाना ज़रूरी है।
  • भाप से स्नान और शरीर की मालिश गठिया के रोग में काफी हद तक लाभ देते हैं।
  • जस्ता, विटामिन सी और कैल्सियम के सप्लीमेंट का अतिरिक्त डोज़ सेवन करने से भी काफी लाभ मिलता है।
  • समुद्र में स्नान करने से भी गठिया के रोग में काफी तक आराम मिलता है।
  • सुबह उठते ही आलू का ताज़ा रस और पानी को बराबर अनुपात में मिलाकर सेवन करने से भी काफी फायदा मिलता है।
  • सोने से पहले दर्द वाली जगह पर सिरके से मालिश करने से भी पीड़ा काफी कम हो जाती है।
  • गठिया के रोगी को ना ही ज्यादा देर तक खाली बैठना चाहिए और न ही आवश्यकता से अधिक परिश्रम करना चाहिए, क्योंकि गतिहीनता के कारण जोड़ों में अकड़न हो जाती है, और अधिक परिश्रम से अस्थिबंध को हानि पहुँच सकती है।
  • नियमित रूप से ६ से ५० ग्राम अदरक के पाउडर का सेवन करने से भी गठिया के रोग में फायदा मिलता है।
  • अरंडी का तेल मलने से भी गठिया का रोग कम हो जाता है।

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