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इन 3 रोगों का खतरा ,डायबिटीज के मरीजों में बढ़ जाता है

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खून में शुगर की मात्रा बढ़ने पर डायबिटीज हो जाता है। आजकल दुनियाभर में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डायबिटीज एक खतरनाक बीमारी है क्योंकि ये शरीर में अन्य कई बीमारियों को जन्म देती है। डायबिटीज दो प्रकार की होती हैं, टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज। आमतौर पर टाइप-2 डायबिटीज को ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि ये मरीज की धमनियों (आर्टरीज) और तंत्रिका प्रणाली (नर्व्स सिस्टम) को प्रभावित करती है। किसी व्यक्ति को डायबिटीज होने पर कुछ अन्य बीमारियों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिस पर ध्यान न देने पर कई बार मरीज की जान भी जा सकती है। आइए आपको बताते हैं कौन सी हैं वो बीमारियां।

किडनी से जुड़ी बीमारियां

डायबिटीज रोग का असर मरीज की किडनियों पर बहुत बुरा पड़ता है। किडनी पर असर पड़ने से हाई ब्लडप्रेशर होना, खून की कमी आदि समस्याएं पैदा हो जाती है। ऐसे में रोगियों को यूरीन टेस्टन करवाने की सलाह दी जाती है। टेस्ट के जरिए यूरीन में प्रोटीन व खून के रिसाव के बारे में पता किया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार डायबिटीज में किडनी फेल होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। किडनी डाय‍लसिस लेने की जरूरत वाले लोगों में 40 फीसदी डायबिटीज के मरीज होते हैं। टाइप टू डायबिटीज के मरीजों में से केवल चार से छह फीसदी ही डाय‍लसिस तक पहुंचते हैं, जबकि 20 से 30 फीसदी की किडनी को किसी न किसी प्रकार का नुकसान जरूरत होता है।

दिल की बीमारियां

टाइप 2 डायबिटीज के रोगियों को दिल की बीमारियों का भी बहुत ज्यादा खतरा होता है। डायबिटीज ग्रस्‍त व्‍यक्तियों को रक्‍तचाप, मोटापा और उच्‍च कोलेस्‍ट्रोल होने का खतरा सामान्‍य लोगों से अधिक होता है। डायबिटीज में आपको अपने खान-पान को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतनी होती है क्योंकि इसमें हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है। वसायुक्त खाने से कोलोस्ट्रोल बढ़ जाता है जो हृदय के लिए खतरनाक है। जिससे हार्टअटैक या हृदयघात जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।

स्ट्रोक हो सकता है

टाइप टू डायबिटीज के मरीज को स्‍ट्रोक का खतरा भी काफी अधिक होता है। जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है उन्‍हें डायबिटीज के मरीजों के मुकाबले स्‍ट्रोक होने का खतरा दो से चार गुना तक कम होता है।

पैर हो सकते हैं खराब

डायबिटीज में अक्सर पैरों की समस्या हो जाती है। इसमें पैर की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे रोगी को चोट लग जाने के बाद भी कोई असर नहीं पड़ता। यही नहीं इसमें ब्लड क्लॉटिंग (खून के थक्के जमना) धीरे होने लगता है, जिससे पैर में लगी हुई चोट काफी दिनों के बाद ठीक होती है। इसके अलावा मधुमेह रोगी में पैरों का संक्रमण भी हो सकता है कभी कभी तो यह इतना फैल जाता है कि रोगी के पैर पूरी तरह से खराब हो जाते हैं और। अगर आपके पैरों में दर्द व सूजन हो तो इसे हल्के में नहीं लें तुरंत डॉक्टर से संपंर्क करें।

डायिबटीज बना सकता है अंधा

डायबिटीज रेटिना में मौजूद छोटी रक्‍तवा‍हिनियों को चोटिल कर देती हैं, जिसका असर हमारी दृष्टि पर पड़ता है। यह अंधेपन का सबसे सामान्‍य कारण माना जाता है। कई बार इसकी शुरुआत कम उम्र में ही हो जाती है। डायबिटीज रोगियों को अपनी आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए क्योंकि मधुमेह में सफेद मोतिया की समस्या, आंखों में तनाव, आंखों के पर्दे के कमजोर होने से धुंधला दिखना शुरु हो जाता है। कई बार तो डायबिटीज से अंधे होने की भी समस्या हो जाती है। आंखों की जांच के समय अपने डॉक्टर से यह जरूर बताएं कि आप डायबिटीज के शिकार हैं।

 

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